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तनाव का कारण विचारों में अनिश्चितता एवं एकाग्रता की कमी
तनाव का कारण विचारों में अनिश्चि तता एवं एकाग्रता की कमी
केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1 में तनाव मुक्ति प्रशिक्षण सम्पन्ना
नीमच : दि. 7.10.26 ‘‘जब हम किसी लक्ष्य की और बढ़ते हैं तो हमारे विचारों में अनिश्चितता व एकाग्रता की कमी हमें लक्ष्य से दूर कर देती है । विचारों का अधिक प्रवाह हमारी एकाग्रता को भंग कर देता है, इसलिए जैसा हम सोचते हैं, बोलते हैं वही हमारे कर्म में आता है और हमारे भाग्य का निर्माण हो जाता है । ’’ उपरोक्त विचार तनाव मुक्ति विशेषज्ञा राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी श्रुति दीदी ने केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1 में आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट ट्रेनिंग के दौरान व्यक्त किये । आपने बताया कि हमेशा हर परिस्थिति के प्रति हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक रहना चाहिए इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी सुप्त आंतरिक शक्तियों का विकास करें और यह कार्य आध्यत्मिक प्रयास अर्थात् मेडिटेशन के द्वारा ही संभव है । मेडिटेशन से जो गहरी शांति और शक्ति मिलती है, इसी उर्जा से हमारी आंतरिक शक्तियाँ विकसित होती हैं ।
स्ट्रेस मैनेजमेंट ट्रेनिंग की सहयोगी बी.के.मेघना बहन ने गृहस्थ परिवार में तनाव का मुख्य कारण अपने कार्यस्थल का तनाव मन में रखकर घर तक ले जाना और इसी से हमारा व्यवहार बदल जाता है तथा परिवार में क्लेश का कारण बनता है । इसलिए अपने कार्यस्थल का तनाव वहीं समाप्त कर घर जाना बेहतर होगा ।
कार्यक्रम की शुरूआत में केन्द्रीय विधालय के प्राचार्य प्रियदर्शन गर्ग ने दोनों ब्रह्माकुमारी दीदीयों का गुलदस्ते भेंट कर स्वागत किया तथा विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक ने लखनलाल मीणा ने स्वागत भाषण देकर कार्यक्रम की भूमिका स्पष्ट की, अंत में प्राचार्य महोदय ने सभी का आभार प्रदर्शन किया ।
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राजयोग मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है – सविता दीदी
राजयोग मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है – सविता दीदी
नीमच : ‘‘जहाँ एक और योग और प्राणायाम का अपना महत्व है वहीं दूसरी और राजयोग मेडिटेशन अपने आप में शारिरीक, मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए संपूर्ण योग है । योग का अर्थ है दो का मिलन, राजयोग में चैतन्य आत्मा का सर्वशक्तिवान परमात्मा से मिलन होता है, जिससे व्यक्ति का निजी, पारिवारिक व सामाजिक जीवन सुख, शान्ति सम्पन्न होकर चरित्र को भी उचांईयां प्रदान करता है । उक्त विचार ब्रह्माकुमारी संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने ‘पावन धाम’ के विशाल सद्भावना सभागार की विशाल छत पर ठंडी शीतल बयार में संध्या से रात्रि तक चली गहन राजयोग तपस्या के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किये । इस राजयोग तपस्या कार्यक्रम में दो घण्टे से अधिक संपूर्ण एकाग्रता व गहन शांति के अनुभवों के साथ बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्सों ने शिरकत की । बी.के.सविता दीदी द्वारा आत्मस्मृति का तिलक प्रदान किया गया तथा बी.के.सुरेन्द्र भाई ने माउण्ट आबू के प्रसाद से सभी का मुंह मीठा करवाया । कार्यक्रम का संचालन बी.के.श्रुति बहन ने किया ।
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पंछियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था हेतु सकोरे वितरित किये गए
नीमच : अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी संस्थान के ‘पावन धाम’ परिसर के सद्भावना सभागार में इस भयंकर गर्मी में पंछियों की प्यास बुझाने एवं उनकी आहार व्यवस्था के लिए मिट्टी के सकोरे निःशुल्क वितरित किये गए। ये सकोरे ब्रह्माकुमारीज संस्थान से संबंधित समाज सेवा प्रभाग के सक्रिय सदस्य एवं राजयोग के नियमित अभ्यासी भ्राता जगदीशचन्द्र शर्मा के सौजन्य से वितरित किये गए। साठ से अधिक बीके भाई बहनों ने पंछियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करने का संकल्प लिया एवं सकोरे प्राप्त किये । इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी बीके सविता दीदी जी, बीके श्रुति दीदी एवं सबझोन डायरेक्टर राजयोगी बीके सुरेन्द्र भाई ने मंच पर सभी को सकोरे वितरित किये ।
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नववर्ष की प्रथम सुबह विशाल दिव्य सत्संग सम्पन्न हुआ
बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज़ के भाई-बहन सम्मिलित हुए
नीमच : दि. 1.1.26, ‘‘नया वर्ष मनाना तभी सार्थक है जब हम अपनी निजी चेकिंग कर अपनी कमी, कमजोरी व दुखी व अशान्त करने वाले संस्कारों को परिवर्तन कर नये दिव्य आध्यात्मिक संस्कार धारण करें तथा स्वयं के द्वारा की गई अपनी भूलों व गलतियों से सबक सीखकर आगे के लिए अभूल बनें ।’’ ये उद्गार ब्रह्माकुमारी संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने नववर्ष की प्रथम सुबह विशाल सद्भावना सभागार में आयोजित दिव्य सत्संग को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये । इस अवसर पर संस्थान के सबझोन निदेशक बी.के.सुरेन्द्र भाई ने सबको नववर्ष की शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि – ‘‘हमें आने वाली स्वर्णिम नई दुनिया, नवयुग की तैयारी करनी है तो हमें अपने अन्दर देवताई संस्कार धारण कर उस दुनिया में जाने के योग्य खुद को बनाना होगा । सबसे पहले यह आवश्यक है कि हमारे मन, वचन, कर्म द्वारा किसी को भी दुख ना पहुंचे । हम सुख के सागर शिव परमात्मा के रूहानी बच्चे हैं तो हमें सबको सुख देना है… हमें सर्व को दुआऐं देना है और दुआऐं अर्जित करना है, यही हमारी सच्ची-सच्ची कमाई हैं । दुआऐ हमारे जीवन में रक्षाकवच का कार्य करती है। जिससे अनेकानेक व्याधियों व परेशानियों से हमारा बचाव होता है । हमें अपने अनादि आत्म स्वरूप में स्थित होकर ब्रह्मलोक के वासी निराकार शिव पिता परमात्मा का सदैव ध्यान लगाते हुए उनकी स्मृति में ही हर कर्म करना है, क्योंकि कर्म का ही हिसाब किताब होता है । अत: कर्मों के प्रति सदैव सजग रहना है ।’’
नववर्ष के ब्रह्ममुहुर्त्त में 3.30 बजे से ही राजयोग की गहन तपस्या का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्सों ने भाग लिया । इस अवसर पर सभी ने परमात्मा शिवबाबा से प्रतिज्ञा कर अपने स्वपरिवर्तन का दृढ़ संकल्प धारण किया । कार्यक्रम के अंत में राजयोग ध्यान के माध्यम से सर्वशक्तिवान परमात्मा को ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा महाभोग स्वीकार करवाया गया तथा सभी को यह दिव्य महाभोग वितरित किया गया ।
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