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अपनी संकल्प शक्ति का सदुपयोग ही हमारे जीवन में एकाग्रता एवं सुख शातिं प्रदान करेगा

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जिला मुख्यालय के सभी न्यायाधीशगण हेतु ‘तनाव मुक्ति एवं एकाग्रता’ कार्यशाला सम्पन्न

नीमच, दि. 23.मार्च-21   विश्व विख्यात मोटिवेशनल स्पीकर मानस मर्मज्ञ महर्षि, संकल्प सिद्ध योगी, राजऋषि ब्रह्माकुमार बी.के.सूर्य भाई के संक्षिप्त नीमच प्रवास पर जिला मुख्यालय के सभी सम्माननीय न्यायाधीशगण हेतु ‘तनाव मुक्ति एवं एकाग्रता’ कार्यशाला का आयोजन रात्रि 8 से 10 बजे तक ब्रह्माकुमारी संस्थान के विशाल सद्भावना सभागार में आयोजित किया गया । इस कार्यशाला का शुभारंभ बी.के.सूर्य भाई जी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री हृदये

श श्रीवास्तव, माउण्ट आबू से पधारी बी.के.गीता बहन एवं राजयोगी रूपेश भाई के साथ ही बी.के.सविता दीदी एवं बी.के.सुरेन्द्र भाई ने विश्व शांति की कामना से दीप प्र‚ज्जलित करके किया ।

कार्यक्रम की प्रथम वक्ता, साहित्य सृजक एवं तनाव मुक्ति विशेषज्ञा बी.के.गीता बहन ने अपने उद्बोधन में बताया कि सारी समस्याओं की जड़ हमारा नकारात्मक एवं व्यर्थ चिन्तन है यदि प्रात: काल जागते ही हम केवल 5-7 मिनिट प्रभु का ध्यान कर व उनसे दिन भर अपने साथ रहने की कामना के साथ यदि हम दिनचर्या का प्रारंभ करें तो आप दिन भर में अनेक सुखद परिणाम प्राप्त करेंगे तथा रात्रि को सोते समय केवल 10 मिनिट मेडिटेशन कर सर्वशक्तिवान परमात्मा के सामने अपना दिन भर का चार्ट रखकर उनके सानिध्य में निद्रा मग्न होंगे तो हमारी निद्रा एवं प्रात: जागरण अति सुखद व आनन्द मय होगा । किन्तु जरूरत है कुछ आध्यात्मिक प्रशिक्षण की जिससे हम अपनी संकल्प शक्ति जिसमें की एक जबरदस्त रचनात्मक उर्जा छिपी हुई है का सदुपयोग कर सकें । आध्यात्मिकता से तुरंत परिणाम मिलते हैं यदि केवल हम 5-7 चुनिंदा श्रैष्ठ विचारों का मनन चिंतन करके लगातार उन्हें दोहराना शुरू कर दें तो उसके चमत्कारी परिणाम प्राप्त होंगे ।

कार्यक्रम के अन्य वक्ता, आध्यत्मिक टेलिफिल्मों के कलाकार एवं लोकप्रिय टी.वी.एंकर बी.के.रूपेश भाई ने आध्यात्म की गहन विविधताओं को सहज करके समझाया एवं बताया कि यदि हम अंर्तमुखी होकर अपने अंतर की गहराईयों को एक छोटे आध्यात्मिक प्रशिक्षण के माध्यम से समायोजित करना सीख लें तो जीवन की सर्व समस्याओं का हल सहज मिल जाएगा । आपने एक सुंदर कोटेशन के द्वारा आध्यात्म की महत्ता बताई – “”मैं भीतर गया…  मैं  भी  तर  गया…” रनिंग कॉमेन्ट्री द्वारा मेडिटेशन के विशेषज्ञ रूपेश भाई इस विषय में विश्व विख्यात हैं ।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता बी.के.सूर्य भाई ने कुछ तनावमुक्ति व आध्यात्म के टिप्स देकर रनिंग कॉमेन्ट्री द्वारा शक्तिशाली समर्थ संकल्प देकर सभी को मेडिटेशन करवाकर तनावमुक्ति एवं गहन सुख-शांति की अनुभूति करवाई । आपने आने वाली परिस्थितियों से अवगत करवाते हुए बताया कि कोरोना महामारी तो कुछ भी नहीं अब अधिकतर मनुष्य अपने नकारात्मक सोच, व्यर्थ चिंतन एवं पापों में वृद्धि के कारण ‘डिप्रेशन’ महामारी के शिकार होंगे और आने वाले कुछ वर्षों में विश्व की 25% आबादी डिप्रेशन की शिकार होगी तथा सुसाईड केस बहुत तेजी से बढ़ते जाऐंगे । यहीं हमें संभलना होगा, अपने निगेटिव विचार और आत्म विश्वास की कमी को नगण्य न समझकर बहुत गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकें । करना बहुत ज्यादा कुछ नहीं है… केवल अपने आप के ‘आत्म स्वरूप’ को पहचानकर अपनी संकल्प शक्ति को सकारात्मक और शक्तिशाली बनाकर न केवल खुद हम अपना बचाव कर सकते हैं अपितु अनेकानेक लोगों को राह दिखाकर उनकी रक्षा भी कर सकते हैं, आपने कुछ उदाहरण देकर समझाया कि – पानी की ग्राह्य शक्ति सर्वाधिक संवेदनशील होती है यदि हम पानी पीने से पूर्व केवल कुछ सेकेण्ड अपने शक्तिशाली एवं समर्थ सकारात्मक संकल्पों से पानी को चार्ज करना सीख लें तो भी हमारा स्वास्थ्य एवं स्वस्थिति आनन्दमय हो सकती है । क्योंकि शरीर का 70% भाग पानी से संचालित है । अत: इसपर गंभीरता पूर्वक ध्यान देने की आवश्यकता है ।

कार्यक्रम के अंत में अनेक न्यायाधीशगण ने प्रश्नोत्तर द्वारा अपनी शंका समाधान की । कार्यक्रम का संचालन बी.के.सुरेन्द्र भाई ने एवं आभार प्रदर्शन बी.के.सविता दीदी ने किया । इस पूरे कार्यक्रम में सैनेटाईजिंग, सोश्यल डिस्टेंसिंग एवं मास्क के प्रयोग का पूरा ध्यान रखा गया । इस कार्यक्रम में जिला जज श्री हृदयेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में फैमिली कोर्ट जज श्री अखिलेश शुक्ला, स्पेशल जज श्री विवेक श्रीवास्तव, ए.डी.जे. श्री अजय सिंह ठाकुर, ए.डी.जे.श्री संजय जैन, ए.डी.जे.श्री विवेक कुमार, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी श्री विवेकानन्द त्रिवेदी, डिस्ट्रीक रजिस्ट्रार श्री सदाशिव दांगड़े, सिविल जजगण श्री एम.एस. दहलवी, श्री डॉ. मनोज गोयल, कुमारी स्वाति कौशल  एवं कुमारी प्रमिला रॉय सहित अनेक परिवार भी सम्मिलित हुए । अंत में स्वल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ तथा सभी ने ग्रुप फोटो सेशन भी करवाया ।

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हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझ पुण्य कर्म करो – मातेश्वरी की शिक्षा

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मातेश्वरी सरस्वती के 61वें पुण्य स्मृति दिवस पर बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्स जुटे
नीमच : दि. 24 जून अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के 61 वें स्मृति पुण्य दिवस पर ज्ञान मार्ग स्थित विशाल सद्भावना सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया । यह कार्यक्रम ब्रह्ममुर्हूत्त से ही प्रारंभ हो गया । इस प्रात: कालीन आध्यात्मिक समागम में बहुत बड़ी संख्या में नीमच के ब्रह्मावत्सों ने भाग लिया । इस समागम में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘मातेश्वहरी जगदम्बा मम्मा ने परमात्मा की हर आज्ञा को शिरोधार्य कर अपने स्वरूप को उन शिक्षाओं के अनुसार ढाला । मातेश्व री मम्मा हमेशा ध्यान दिलाती थी कि हर घड़ी को अपनी अंतिम घड़ी समझ कर हर कर्म करें तो सदैव सुकर्म ही होंगे। आपने अपने दिव्य चाल चलन और चरित्र से लाखों ब्रह्मावत्सों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया एवं उनकी हर समस्या का समाधान भी दिया ।’’
लगभग दो घंटे चले इस विशाल आध्यात्मिक समागम में सामुहिक राजयोग ध्यान एवं सत्संग के साथ ही महाभोग का आयोजन भी रखा गया । कार्यक्रम के अंत में सभी को आत्म स्मृति का तिलक लगाकर महाभोग प्रसादी वितरित की गई ।

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त्रिदिवसीय तनाव मुक्त खुशहाल जीवन शैली केम्प का समापन सम्पन्‍न

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त्रिदिवसीय तनाव मुक्त खुशहाल जीवन शैली केम्प का समापन सम्पन्‍न
विधायक सहित अनेकानेक गणमान्य नागरिकों ने शिविर का लाभ लिया
नीमच : दि. 29.10.25 ‘‘सारे दिन में हम कितनों से मिलते हैं, लेकिन हम अपने आप से क्या कभी मिल पाते हैं, हम दूसरों से सम्बन्ध तो मधुर बनाने का प्रयास करते हैं, किन्तु हमें अपने आप से सम्बन्ध बनाने के लिए समय भी नहीं है.. समझ भी नहीं है.. न तो हम अपने मन को समझ पाते हैं और हर बात के लिए मन को दोषी ठहरा देते हैं, जबकि सबसे अच्छा दोस्त हमारा मन ही हो सकता है । लेकिन मन को तो हमने दुश्‍मन बनाके रखा है । इन सब नासमझियों का एक ही कारण है कि हम स्वयं को देह मानकर जीवन जी रहे हैं। जबकि वास्तविकता तो ये है कि ‘मैं’ अर्थात ही एक चैतन्य शक्ति आत्मा.. आत्मा का ज्ञान न होने से ही देह अभिमान के कारण ही हम और हमारी कर्मेन्द्रियां काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार के वशीभूत हो जाती हैं । जब आत्मा का सत्य ज्ञान प्राप्त हो जाता है तो आत्मा के मूल गुण ही सुख, शांति, प्रेम, आनन्द, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति है, और इन्हीं गुणों की तलाश में मानव दर-दर भटक रहा है । राजयोग मेडिटेशन हमें ज्ञान के इन मूल तत्वों से अवगत करवाता है और परमात्मा से सम्बन्ध स्थापित करके सुख, शांति, आनन्द के खजानों से भरपूर बना देता है’’ उपरोक्त विचार हर हाल में खुशहाल शिविर के तीसरे व अंतिम दिन विश्‍व विख्यात प्रेरक वक्‍ता प्रो.ई.वी.गिरीश ने व्यक्त किये । प्रोफेसर गिरीश ने शिविर के अंतिम सत्र में राजयोग मेडिटेशन के विधि विधान से अवगत करवाते हुए 15 मिनिट तक अपने शब्दों की कॉमेन्ट्री द्वारा सुख, शांति, प्रेम व आनन्द की गहन अनुभूति भी करवाई ।
अंतिम सत्र के प्रारंभ में प्रोफेसर ई.वी.गिरीश, विधायक दिलीप सिंह परिहार, सिविल जज शोभना मीणा, राजयोगिनी बी.के.सविता दीदी, बी.के.सुरेन्द्र भाई, हार्टफुलनेस ग्रुप के राजमल व्यास, इंजिनियर बी.एल. गौर, पर्यावरण मित्र जगदीश शर्मा आदि ने दीप प्रज्‍जवलित कर सत्र का शुभारंभ किया। विधायक दिलीप सिंह परिहार ने सत्र के शुरू में अपने उद्‌बोधन में ब्रह्माकुमारी संस्थान के मानव उत्थान की की दिशा में विश्‍व व्यापी प्रयासों की सराहना की । शिविर के मध्यकाल में बी.के.सविता दीदी ने कॉमेन्ट्री देकर राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करवाया। कार्यक्रम का संचालन बी.के.श्रुति बहन ने किया तथा आभार प्रदर्शन बी.के.सुरेन्द्र भाई ने किया ।

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सेकेण्डरी स्कूल के 800 विद्यार्थियों को ‘डिजिटल डिटॉक्स’ कार्यक्रम देकर प्रो.गिरीश ने लाभान्वित किया

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मोबाईल, टीवी के एडीक्शन से सचेत कर छात्रों को लक्ष्य प्राप्ति के लिए जागृत किया
नीमच : दि. 28.10.25 ‘‘हम सारे दिन में जो भी अच्छा या बुरा लगातार करते हैं मस्तिष्क उसको नहीं जानता किन्तु उन कार्यों को आगे के लिए सरल करता जाता है और ब्रेन एक इनसाईड पाथ वे बना देता है, यही हमारी एडिक्शन अर्थात आदत बन जाती है । यदि रात को थक कर रिलेक्‍स होने के ल‍िए मोबाईल देखकर सोना चाहते हैं तो ब्रेन रिलेक्स होने के बजाए सुपर एक्टिव हो जाता है तथा रात्रि को नींद के लिए आवश्यक हारमोन ‘मेलाटॉनिन’ का बनना एकदम कम कर देता है, जिससे आगे चलकर अनिद्रा की बीमारी बढ़ती चली जाती है । स्क्रीन की ब्लू लाईट आंखों पर दुष्प्रभाव डालती है जिसका मस्तिष्क पर भी बहुत बुरा असर होता है ।’’ उपरोक्त जानकारियाँ सेकेण्डरी स्कूल 800 से अधिक विद्यार्थियों को दो सेशन के कार्यक्रमों में प्रोफेसर ई.वी.गिरीश ने अपने उद्‌बोधन से प्रदान की ।
प्रोफेसर गिरीश ने हंसी और खेल खेल में विद्यार्थियों को ‘मार्शमेलो इफेक्ट’ से अवगत करवाया जिसमें खाने की स्वादिष्‍ट मिठाई देकर आत्म नियंत्रण का परीक्षण किया गया । कुछ ने तुरंत खाई, कुछ ने थोड़े समय बाद लेकिन कुछ विद्यार्थिंयों ने आत्मनियंत्रण रखकर पुरूस्कार जीतने तक नहीं खाई । इन सभी का कुछ वर्षों बाद सर्वे करने पर पता चलता है कि आत्म नियंत्रण वाले विद्यार्थी सर्वाधिक सफल पाए गए । उनका आत्मनियंत्रण मेडिटेशन के परिणाम स्वरूप था ।
प्रोफेसर ई.वी.गिरीश ने आज की पीढ़ी के स्वभाव को समझाते हुए बताया कि ये वर्ग इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन अर्थात परिणाम चाहे जो हो उनके मन को तत्काल संतुष्टि चाहिए, इसीलिए फास्ट फूड, विभिन्‍न प्रकार के नशे के आदि होकर अपने जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं । आपने सभी विद्यार्थियों को शार्प मेमोरी का खेल खिलाते हुए 15 चीजों के नाम सुनाऐ जिन्हें अपने ब्रेन में नोट कर रिपीट करना था, किन्तु उसमें कोई विद्यार्थी पास नहीं हुआ, तब प्रोफेसर गिरीश ने इन्हीं चीजों को एक छोटी सी स्टोरी से जोड़कर सुनाया तो लगभग सभी विद्यार्थी उन चीजों के नाम दोहराने में सफल हुए । आपने लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स के सी.ई.ओ. का उदाहरण देकर बताया कि नेटफ्किक्स की सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी नींद है, इसलिए अपने एपिसोड एैसे बनाते हैं जिससे अगले एपीसोड का बेताबी से इंतजार रहता है । और इस प्रकार सोश्यल मिडिया हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है । प्रोफेसर गिरीश ने सबको सावधान करते हुए समझाया कि आज की छात्र पीढ़ी के लिए स्कूलों में आध्यात्मिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चहिए, क्योंकि हर विद्यार्थी स्कूल से मिला सबक उम्रभर याद रखता है ।
एक रिसर्च का हवाला देकर प्रो.गिरीश ने बताया कि ब्रह्ममुहुर्त्त में 3.30 बजे से 4.30 बजे के मध्य मस्तिष्क में बेस्ट हार्मोन्स उत्सर्जित होते हैं । यदि उस समय जागृत अवस्था में मेडिटेशन किया जाए तो स्वास्थ्य को बहुत लाभ मिलता है । इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले कार्मल कान्वेंट और क्रिएटिव माइण्ड स्कूल के लगभग 800 सेकेण्डरी विद्यार्थियों से प्रोफेसर गिरीश ने गुरूदक्षिणा के रूप में पांच वचनों की मांग की जिसमें पहली अपनी माँ से रोज एक बार प्यार से लिपट जाना, दूसरा अपने पापा के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना, तीसरा रात को सोते समय और सुबह उठते समय परमात्मा का स्मरण कर उनसे गुडनाईट और गुडमार्निंग करना, अपने स्कूल के शिक्षकों और स्टॉफ से आदर पूर्वक नमस्ते करना तथा पांचवा अपने छोटे भाई बहनों से लड़ाई झगड़ा न करके प्यार से व्यवहार करना ..।
कार्यक्रम का संचालन बी.के.श्रुति बहन ने किया तथा अंत में सभी को पवित्र प्रसादी प्रदान की गई ।

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