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श्रीकृष्ण के चरित्र के रहस्य स्थूल अर्थों में नहीं लेना चाहिए–सविता बहन

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ब्रह्माकुमारी संस्थान में जन्माष्टमी झांकी व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

नीमच : दि.25.8.19    “विभिन्न शास्त्रों में वर्णित श्रीकृष्ण के भिन्न– भिन्न चरित्र अनेक स्थूल अर्थों वाली कहानियों के साथ जोड़े गए हैं, जैसे –माखन चोर, गोपियों के वस्त्र हरण, हिंसा द्वारा आसुरी शक्तियों का वध, जेल में जन्म होना, 16108 पटरानियाँ बनाना आदि स्थूल चित्रण उनके दिव्य, अलौकिक एवं महानतम चरित्र से मेल नहीं खाते ।” उपरोक्त बात कहते हुए ब्रह्माकुमारी संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी बी.के.सविता दीदी ने श्रीकृष्ण चरित्र के रहस्यों को उजागर करते हुए बताया कि शस्त्रों में किवदंती एवं कथानकों के माध्यम से श्रीकृष्ण के चरित्र ‘रूपक अलंकार’ में वर्णित हैं जिनमें छिपे रहस्यों को उसके सही अर्थों में जानने की आवश्यकता है । ” आपने अपने लम्बे उद्बोधन में अनेकानेक आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर किया ।

अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी संस्थान के विशाल सद्भावना सभागार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सुंदर झांकियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था, ये सभी कार्यक्रम देर रात तक धूमधाम से चले । इन झांकियों में अनेक बाल गोपाल ने श्रीकृष्ण एवं राधे के सुन्दर स्वांग रचे थे साथ ही विभिन्न कलाकारों ने श्रीकृष्ण जन्म, वासुदेव द्वारा टोकरी में ले जाकर श्रीकृष्ण की रक्षा कर यशोदा मैया को सौंपना, श्रीकृष्ण– राधे के युवा रूप श्री लक्ष्मी–नारायण एवं मटकी फोड़ आदि कार्यक्रमों के अलावा गीत–संगीत एवं सांस्कृतिक नृत्य का भी भव्य आयोजन किया गया । इस समूचे कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बाल रूप में सुसज्जित नन्हे बालक आर्यमन चौरड़िया का रहा जिसे सुंदर सुनहरे झूले में सैंकड़ों भाई–बहनों ने झूला झुलाकर परमान्द अनुभव किया । अन्त में सभी को फल, मक्खन व पंजेरी का भोग वितरित किया गया ।

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नववर्ष की प्रथम सुबह विशाल दिव्य सत्संग सम्पन्‍न हुआ

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बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज़ के भाई-बहन सम्मिलित हुए
नीमच : दि. 1.1.26, ‘‘नया वर्ष मनाना तभी सार्थक है जब हम अपनी निजी चेकिंग कर अपनी कमी, कमजोरी व दुखी व अशान्त करने वाले संस्कारों को परिवर्तन कर नये दिव्य आध्यात्मिक संस्कार धारण करें तथा स्वयं के द्वारा की गई अपनी भूलों व गलतियों से सबक सीखकर आगे के लिए अभूल बनें ।’’ ये उद्‌गार ब्रह्माकुमारी संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने नववर्ष की प्रथम सुबह विशाल सद्‌भावना सभागार में आयोजित दिव्य सत्संग को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये । इस अवसर पर संस्थान के सबझोन निदेशक बी.के.सुरेन्द्र भाई ने सबको नववर्ष की शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि – ‘‘हमें आने वाली स्वर्णिम नई दुनिया, नवयुग की तैयारी करनी है तो हमें अपने अन्दर देवताई संस्कार धारण कर उस दुनिया में जाने के योग्य खुद को बनाना होगा । सबसे पहले यह आवश्यक है कि हमारे मन, वचन, कर्म द्वारा किसी को भी दुख ना पहुंचे । हम सुख के सागर शिव परमात्मा के रूहानी बच्चे हैं तो हमें सबको सुख देना है… हमें सर्व को दुआऐं देना है और दुआऐं अर्जित करना है, यही हमारी सच्ची-सच्ची कमाई हैं । दुआऐ हमारे जीवन में रक्षाकवच का कार्य करती है। जिससे अनेकानेक व्याधियों व परेशानियों से हमारा बचाव होता है । हमें अपने अनादि आत्म स्वरूप में स्थित होकर ब्रह्मलोक के वासी निराकार शिव पिता परमात्मा का सदैव ध्यान लगाते हुए उनकी स्मृति में ही हर कर्म करना है, क्योंकि कर्म का ही हिसाब किताब होता है । अत: कर्मों के प्रति सदैव सजग रहना है ।’’
नववर्ष के ब्रह्ममुहुर्त्त में 3.30 बजे से ही राजयोग की गहन तपस्या का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्सों ने भाग लिया । इस अवसर पर सभी ने परमात्मा शिवबाबा से प्रतिज्ञा कर अपने स्‍वपरिवर्तन का दृढ़ संकल्प धारण किया । कार्यक्रम के अंत में राजयोग ध्यान के माध्यम से सर्वशक्तिवान परमात्मा को ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा महाभोग स्वीकार करवाया गया तथा सभी को यह दिव्य महाभोग वितरित किया गया ।

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संविधान के पालन से राष्ट्रोन्नति एवं ईश्वरीय विधान के पालन से आत्मोन्नति होगी

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ब्रह्माकुमारी संस्थान में राष्ट्रध्वज लहराकर राष्ट्रोन्नति की शपथ ली गई

नीमच: दि. 26 जनवरी ‘‘प्रत्येक राष्ट्र एवं राष्ट्र के नागरिकों का हित उस देश में लागू होने वाले विधि-विधान के पालन में समाया है । संविधान का पालन देश में प्रेम, एकता, सद्भावना एवं अनुशासन बनाए रखने में बहुत उपयोगी रहता है । किन्तु मनुष्यात्मा यदि देश के संविधान के साथ ईश्वरीय एवं आध्यात्मिक विधि-विधान का पालन कर अपने आचरण में उतारे तो देव पद की प्राप्ति के साथ निकट भविष्य में आने वाली स्वर्णिम सतयुगी दुनिया की हकदार बनेगी।’’ उक्त विचार ब्रह्माकुमारी संस्थान के एरिया डायरेक्टर बी.के.सुरेन्द्र भाई ने गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किये । आपने सारे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय शांतिदूत के रूप में सेवारत ब्रह्माकुमारी संस्थान के पवित्र व आध्यात्मिक नीति-नियमों का हवाला देकर बताया कि इस ईश्वरीय विधान के पालन से 150 से अधिक देशों के लाखों परिवार आज की तनावमय वैश्विक परिस्थितियों में भी तनावमुक्त खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं, साथ ही अपने राष्ट्र की उन्नति में संपूर्ण मददगार हैं ।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता बहन के नेतृत्व में राष्ट्र ध्वज लहराकर सभी ने राष्ट्र गीत गाया, तत्पश्चात बड़ी संख्या में उपस्थित ब्रह्मावत्सों ने विश्व कल्याण की कामना से स्वपरिवर्तन से विश्व परिवर्तन की प्रतिज्ञा ग्रहण की साथ ही सविता दीदी ने सभी को देश में चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान का पूर्ण समर्थन कर सहयोगी बनने की प्रतिज्ञा दिलवाई । अंत में सभी को मिठाई वितरण की गई ।

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ब्रह्माकुमारीज़ नीमच सबझोन के जावद केन्द्र पर ईश्‍वरीय रक्षाबंधन

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जावद (नीमच) : अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा विश्‍व के 150 देशों में ईश्‍वरीय रक्षा सूत्र बांधने का कार्यक्रम लगभग 1 माह तक चलाया जाता है, इसी के अन्तर्गत ब्रह्माकुमारीज़ जावद केन्द्र पर संस्थान की सबझोन संचालिका आदरणीया बी.के.सविता दीदी जी द्वारा बड़ी संख्या में उपस्थित ब्रह्मावत्सों को ईश्‍वरीय शक्ति सम्पन्‍न.. दिव्य ज्योति का प्रतीक रक्षासूत्र बांधकर सभी का मुख मीठा कराया गया ।

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Brahma Kumaris Neemuch