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भगवान ने हमें इसलिए चुना है कि हम इस कलियुगी सृष्टि को बदलने में उसके मददगार बनें – शिवानी दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ ‘पावन धाम’ पर राजयोग मेडिटेशन ट्रेनिंग केम्प शुरू हुआ
नीमच : विश्व विख्यात प्रेरक वक्ता शिवानी दीदी ने स्थानीय टाउन हॉल में आयोजित दिव्य सत्संग कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़, नीमच सबझोन के सैंकड़ों नियमित राजयोगी ब्रह्मावत्सों को सम्बोधित किया तथा एैसे आध्यात्मिक सूत्र बताए जिनका वर्णन किसी शास्त्र में भी नहीं है.. आपने अपने आध्यात्मिक रहस्यों से युक्त सम्बोधन में कहा – ‘‘सर्वशक्तिवान परमात्मा शिवबाबा ने जब ब्रह्मातन में प्रवेश करके कलियुगी सृष्टि का परिवर्तन कार्य प्रारंभ किया तो उसने अपने मददगार और वारिस बच्चों का चुनाव भी किया । सारे विश्व में लाखों भाई-बहनें अपने तन-मन-धन से आध्यात्मिक क्रान्ति के सहभागी बनकर सृष्टि परिवर्तन की सेवा में लगे हैं । दुनिया चाहे अभी तक समझ नहीं पाई हो, किन्तु आप राजयोगी ब्रह्मावत्स तो दिल की गहराईयों से जानते हो कि निराकार सर्वशक्तिवान शिवबाबा हमें रोज ज्ञान मुरली के माध्यम से पढ़ाते हैं । अनेक भाई-बहन ज्ञान मार्ग पर आने के पश्चात यह कहते पाए जाते हैं कि हमारा जीवन राजयोग की राह पर चलकर बहुत संतुष्ट, सम्पन्न और आनन्दमय हो गया है, किन्तु परमात्मा ने हमें इसलिए नहीं चुना कि हम खुद आनन्द और मौज की प्राप्ति कर घर बैठ जाए बल्कि इसलिए चुना कि इस विश्व में हर एक तक यह संदेश जाए कि अब यह कलियुगी सृष्टि बदल रही है.. अचानक कुछ भी हो सकता है.. और हो भी रहा है… कल तक टर्की एक सम्पन्न व विकसित देश माना जाता था, आज टर्की और सीरिया खण्डहर में बदल चुके हैं.. अब सब सामने दिख रहा है.. आखरी समय है.. देखा यह भी गया है..कि कई विद्यार्थी साल के आखरी महिने में भी पढ़ाई करके अच्छे नम्बरों से पास हो जाते हैं.. हमें भी खुद एक पवित्र राजयोगी बनकर विश्व कल्याण के कार्य में अपनी अंगुली लगानी है । कार्य तो परमात्मा का है, हम केवल सहयोगी बन जाए तो अवश्य देवपद की प्राप्ति करेंगे ।
शिवानी दीदी ने उपस्थित सैंकड़ों ब्रह्मावत्सों को अलबेलेपन को समाप्त कर अपने को अलर्ट मोड पर रखने को कहा और कहा कि अब अपने कर्मों को दिव्य बनाओ.. सारी दुनिया आशा भरी नजरों से हमें निहार रही है.. हमें हरेक की सुख शांति की कामना पूर्ण करनी है । क्योंकि विश्व परिवर्तन का समय समीप है और दुख अशांति भी अति के बाद अंत की और जाना ही है । शिवानी दीदी ने अपने खान पान की पवित्रता पर पूरा ध्यान देने पर जोर देकर कहा कि जितनी बार भी हम पानी पीते हैं उतनी बार जल में कुछ शक्तिशाली संकल्प के वायब्रेशन दें और परमात्मा की स्मृति में भोजन अथवा पानी को स्वीकार करें । क्योंकि ये दोनों ही पदार्थ बहुत संवेदनशील होते हैं जो वायुमण्डल से प्रभावित होते है ।’’
दिव्य सत्संग के समापन पर विशाल सभा में उपस्थित सभी ब्रह्मावत्सों ने खड़े होकर दीदी का अभिवादन किया, इस अवसर पर शिवानी दीदी के साथ मंच पर सबझोन संचालिका राजयोगिनी बी.के.सविता दीदी और बी.के.सुरेन्द्र भाई भी उपस्थित थे । बी.के.सुरेन्द्र भाई ने जानकारी देकर यह भी बताया कि दि. 1,2 व 3 मार्च तक चलने वाले राजयोग मेडिटेशन ट्रेनिंग केम्प ब्रह्माकुमारीज़ पावन धाम के विशाल सद्भावना सभागार में प्रारंभ हो चुके हैं तथा ट्रेनिंग केम्प के प्रथम दिन ही बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति पाई गई ।
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राजयोग मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है – सविता दीदी
राजयोग मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है – सविता दीदी
नीमच : ‘‘जहाँ एक और योग और प्राणायाम का अपना महत्व है वहीं दूसरी और राजयोग मेडिटेशन अपने आप में शारिरीक, मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए संपूर्ण योग है । योग का अर्थ है दो का मिलन, राजयोग में चैतन्य आत्मा का सर्वशक्तिवान परमात्मा से मिलन होता है, जिससे व्यक्ति का निजी, पारिवारिक व सामाजिक जीवन सुख, शान्ति सम्पन्न होकर चरित्र को भी उचांईयां प्रदान करता है । उक्त विचार ब्रह्माकुमारी संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने ‘पावन धाम’ के विशाल सद्भावना सभागार की विशाल छत पर ठंडी शीतल बयार में संध्या से रात्रि तक चली गहन राजयोग तपस्या के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किये । इस राजयोग तपस्या कार्यक्रम में दो घण्टे से अधिक संपूर्ण एकाग्रता व गहन शांति के अनुभवों के साथ बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्सों ने शिरकत की । बी.के.सविता दीदी द्वारा आत्मस्मृति का तिलक प्रदान किया गया तथा बी.के.सुरेन्द्र भाई ने माउण्ट आबू के प्रसाद से सभी का मुंह मीठा करवाया । कार्यक्रम का संचालन बी.के.श्रुति बहन ने किया ।
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पंछियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था हेतु सकोरे वितरित किये गए
नीमच : अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी संस्थान के ‘पावन धाम’ परिसर के सद्भावना सभागार में इस भयंकर गर्मी में पंछियों की प्यास बुझाने एवं उनकी आहार व्यवस्था के लिए मिट्टी के सकोरे निःशुल्क वितरित किये गए। ये सकोरे ब्रह्माकुमारीज संस्थान से संबंधित समाज सेवा प्रभाग के सक्रिय सदस्य एवं राजयोग के नियमित अभ्यासी भ्राता जगदीशचन्द्र शर्मा के सौजन्य से वितरित किये गए। साठ से अधिक बीके भाई बहनों ने पंछियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करने का संकल्प लिया एवं सकोरे प्राप्त किये । इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी बीके सविता दीदी जी, बीके श्रुति दीदी एवं सबझोन डायरेक्टर राजयोगी बीके सुरेन्द्र भाई ने मंच पर सभी को सकोरे वितरित किये ।
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नववर्ष की प्रथम सुबह विशाल दिव्य सत्संग सम्पन्न हुआ
बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज़ के भाई-बहन सम्मिलित हुए
नीमच : दि. 1.1.26, ‘‘नया वर्ष मनाना तभी सार्थक है जब हम अपनी निजी चेकिंग कर अपनी कमी, कमजोरी व दुखी व अशान्त करने वाले संस्कारों को परिवर्तन कर नये दिव्य आध्यात्मिक संस्कार धारण करें तथा स्वयं के द्वारा की गई अपनी भूलों व गलतियों से सबक सीखकर आगे के लिए अभूल बनें ।’’ ये उद्गार ब्रह्माकुमारी संस्थान की सबझोन संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने नववर्ष की प्रथम सुबह विशाल सद्भावना सभागार में आयोजित दिव्य सत्संग को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये । इस अवसर पर संस्थान के सबझोन निदेशक बी.के.सुरेन्द्र भाई ने सबको नववर्ष की शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि – ‘‘हमें आने वाली स्वर्णिम नई दुनिया, नवयुग की तैयारी करनी है तो हमें अपने अन्दर देवताई संस्कार धारण कर उस दुनिया में जाने के योग्य खुद को बनाना होगा । सबसे पहले यह आवश्यक है कि हमारे मन, वचन, कर्म द्वारा किसी को भी दुख ना पहुंचे । हम सुख के सागर शिव परमात्मा के रूहानी बच्चे हैं तो हमें सबको सुख देना है… हमें सर्व को दुआऐं देना है और दुआऐं अर्जित करना है, यही हमारी सच्ची-सच्ची कमाई हैं । दुआऐ हमारे जीवन में रक्षाकवच का कार्य करती है। जिससे अनेकानेक व्याधियों व परेशानियों से हमारा बचाव होता है । हमें अपने अनादि आत्म स्वरूप में स्थित होकर ब्रह्मलोक के वासी निराकार शिव पिता परमात्मा का सदैव ध्यान लगाते हुए उनकी स्मृति में ही हर कर्म करना है, क्योंकि कर्म का ही हिसाब किताब होता है । अत: कर्मों के प्रति सदैव सजग रहना है ।’’
नववर्ष के ब्रह्ममुहुर्त्त में 3.30 बजे से ही राजयोग की गहन तपस्या का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्सों ने भाग लिया । इस अवसर पर सभी ने परमात्मा शिवबाबा से प्रतिज्ञा कर अपने स्वपरिवर्तन का दृढ़ संकल्प धारण किया । कार्यक्रम के अंत में राजयोग ध्यान के माध्यम से सर्वशक्तिवान परमात्मा को ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा महाभोग स्वीकार करवाया गया तथा सभी को यह दिव्य महाभोग वितरित किया गया ।
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